हास्य माध्यम है, व्यंग्य लक्ष्य है! | रवीन्द्रनाथ त्यागी को समझिए | Humour | Kavi Sanjay Jhala | TNC
रवीन्द्रनाथ त्यागी, हिंदी व्यंग्य के उन अनूठे शिल्पियों में थे, जिन्होंने हंसी को सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने का माध्यम बनाया। उनके शब्दों में विद्वत्ता थी, भाषा में कविता थी और व्यंग्य में गहरी करुणा। हरिशंकर परसाई और शरद जोशी के साथ हिंदी व्यंग्य की त्रिवेणी में उनका विशिष्ट स्थान माना जाता है। “हास्य माध्यम है, व्यंग्य लक्ष्य है” — यह पंक्ति, उनके पूरे व्यंग्य-दर्शन को समझने की सबसे बड़ी कुंजी है। इस विशेष प्रस्तुति में, कवि संजय झाला से जानिए रवीन्द्रनाथ त्यागी के जीवन, साहित्य, हास्य, व्यंग्य, भाषा और उस दृष्टि को, जो आज भी समाज और हमें खुद से सवाल करने पर मजबूर करती है।
